
30 अगस्त को गोवा में आचार्य जी के साथ Weekend With Master शिविर के दौरान संत सरिता सत्र हुआ। यह सत्र सुबह की HIDP (Holistic Individual Development Program) ऐक्टिविटीज़ के बाद हुआ। इस सत्र में आचार्य जी ने कबीर साहब के भजन 'संतों सो निज देश हमारा' की पंक्तियाँ समझाते हुए बताया कि जब भी कोई बात कही जाती है, उसे सुनने वाला हमेशा अहंकार ही होता है- फ़र्क बस इतना होता है कि अहंकार किस नीयत से सुन रहा है। उन्होंने कहा कि साधु वही है जो ईमानदारी से मिटने को तैयार हो, और यही तैयारी तय करती है कि कोई बात हमारे भीतर उतरेगी या नहीं। आचार्य जी ने घर और ताले का उदाहरण देकर समझाया कि हमारा घर हमेशा हमारे साथ ही होता है, पर हम ख़ुद ही अपनी इच्छा से उस पर ताला बनकर लटके रहते हैं - कोई बाहरी चाबी हमें कभी आज़ाद नहीं करेगी, क्योंकि दरवाज़ा हमने ही बंद कर रखा है। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया की कोई भी चीज़- कोई विषय, कोई व्यक्ति, कोई जगह - हमें चैन नहीं दे सकती, क्योंकि चैन कहीं बाहर मिलता ही नहीं, वह सिर्फ़ अपने ही मिटने में है। देशभर से आए प्रतिभागियों ने इस सत्र में बड़े उत्साह से हिस्सा लिया। गोवा में सितंबर भर हर वीकेंड Weekend With Master शिविर होते रहेंगे। इसी कड़ी में 4-5 सितंबर को दो-दिवसीय जन्माष्टमी महोत्सव हो रहा है और 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी उत्सव होगा। अक्टूबर में आचार्य जी दिल्ली-एनसीआर लौटेंगे, जब कई Weekend With Master शिविरों के साथ-साथ तीन-दिवसीय दशहरा महोत्सव भी होगा। सत्र के वीडियोज़ आपके साथ जल्द ही साझा किए जाएँगे।




















