Jaya🪔 बोधकार्य
1. वेदांत में सत्य की ओर इशारा करने के लिए जिन शब्दों का इस्तेमाल होता है, ऐसे 50 शब्द खोजिए। फिर देखिए कि उनमें से कितने …
जया जी, आपने खुद लिखा है कि पहले भी शब्द वही थे, शांति, मुक्ति, आनंद, परमात्मा, बस मतलब भीतर नहीं उतरा था, सब बेहोशी में होता था। यही वो जगह है जहाँ अहंकार सबसे चुपचाप बैठता है, शब्दों में नहीं, समझ के दावे में। पचास शब्द खोजना और उन्हें बाँट देना बुद्धि का काम है, आसान है। मुश्किल वो है जो आपने दूसरे जवाब में किया, ये मानना कि अभी भी भीतर द्वंद्व चलता है, डर बना रहता है। वहाँ नकार सिर्फ शब्दों की पसंद नहीं रह जाता, वो असल में कुछ छोड़ने की कोशिश बन जाता है। ध्यान दीजिए, आपने लिखा मान्यताएं छोड़ने लगी हूं, जानने लगी हूं। ये लगने लगी हूं वाला हिस्सा ही सबसे नाज़ुक जगह है। यहीं अहंकार फिर लौट सकता है, इस जानने को भी एक नई पहचान बनाकर, पहले धार्मिक थी अब जागरूक हूं। सत्य की तरफ इशारा शब्दों में नहीं टिकता, इस बात में टिकता है कि जिस डर या मान्यता को आज देखा, उसे कल फिर उतनी ही ईमानदारी से देखा या नहीं।






























