
✍🏻 पोस्ट 1 | 18 अक्टूबर '26 💭 विषय — इंडियन करंट अफेयर्स ───────────── 👩 क्या महिलाएँ सच में नौकरी नहीं करना चाहतीं? एक महिला नौकरी करना चाहती है। घर और बच्चों की देखभाल पूरी तरह उसी की जिम्मेदारी है। नौकरी के लिए समय निकालना संभव नहीं, इसलिए वह आवेदन ही नहीं करती। क्या वह बेरोज़गारी के आँकड़े में गिनी जाएगी? 📊 15 अक्टूबर को जारी सितंबर 2026 के PLFS बुलेटिन के अनुसार, भारत में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की बेरोज़गारी दर 5% रही। इसी आयु वर्ग की महिलाओं की श्रमबल भागीदारी दर 34.6% थी। पिछले वर्ष सितंबर में यह 34.1% थी। 📖 दोनों आँकड़े अलग बातें बताते हैं। श्रमबल में वे लोग आते हैं जो रोजगार में हैं या बिना रोजगार के काम खोज रहे हैं अथवा काम के लिए उपलब्ध हैं। बेरोज़गारी दर इसी श्रमबल में बेरोज़गार लोगों का प्रतिशत है, पूरी आबादी का नहीं। इसलिए 5% बेरोज़गारी का अर्थ यह नहीं कि बाकी 95% लोगों के पास रोजगार है। 🏠 घर का अवैतनिक काम और परिवार की देखभाल करने वाला व्यक्ति भी बहुत काम करता है। फिर भी केवल इन गतिविधियों के आधार पर उसे रोजगार में नहीं गिना जाता। ⏱️ भारत के Time Use Survey 2024 में अवैतनिक घरेलू काम करने वाली महिलाओं और लड़कियों ने प्रतिदिन औसतन 4 घंटे 49 मिनट इन कामों में लगाए। पुरुषों और लड़कों में यह समय 1 घंटा 28 मिनट था। यह तुलना 6 वर्ष और उससे अधिक उम्र के उन लोगों की है जिन्होंने सर्वेक्षण में दर्ज दिन ये काम किए थे। 🌍 ILO के 2024 में प्रकाशित अनुमान के अनुसार, 2023 में अवैतनिक देखभाल की जिम्मेदारियों के कारण दुनिया भर में 70.8 करोड़ महिलाएँ श्रमबल से बाहर थीं। इसी कारण बाहर रहने वाले पुरुषों की संख्या 4 करोड़ थी। हर महिला के बाहर होने का कारण एक नहीं है। पढ़ाई, स्वास्थ्य, अवसरों की कमी और अन्य परिस्थितियाँ भी अलग से देखनी होंगी। 🪞 यहीं “उसने नौकरी नहीं करने का चुनाव किया” कहने से पहले एक सवाल बनता है: उसके सामने विकल्प क्या थे? घर में किसी की नौकरी के अनुसार सबका समय तय होता है। किसी दूसरे से उम्मीद रहती है कि वह अपना समय सबके अनुसार बदले। यह बँटवारा किस आधार पर हुआ? यह पहले से मान लिया गया कि घर सँभालना स्त्री की भूमिका है। 🔎 अहंकार केवल अपनी भूमिका नहीं पकड़ता। दूसरों को मिली भूमिकाओं से अपनी सुविधा और पहचान भी सुरक्षित रखता है। तब कोई स्त्री अपनी दिशा बदलना चाहे, तो प्रश्न उसके काम का कम और “हमारा घर कैसे चलेगा?” का अधिक हो जाता है। क्या घर चलने का अर्थ उसी एक व्यक्ति का अपनी दिशा छोड़ना है? 💬 “उसने नौकरी न करने का चुनाव खुद किया है” कहने से पहले क्या जाँचना ज़रूरी है? A. हमारी अपेक्षाएँ उसके विकल्प सीमित कर रही हैं? B. वह घर के सारे काम समय पर पूरे करती है? C. उसकी कमाई के बिना घर चल रहा है? D. परिवार की दूसरी महिलाओं ने भी यही किया था? स्रोत: https://www.fortuneindia.com/economy/india-unemployment-rate-stays-at-5-in-sept-2026-urban-labour-participation-improves/165038 https://mospi.gov.in/uploads/release_calendar/1792061557528_Monthly_Press_note_PLFS_Sep_2026.pdf https://www.ilo.org/publications/impact-care-responsibilities-women%25s-labour-force-participation
















































