
✍🏻 पोस्ट 20 | 7 अक्टूबर'26 💭 विषय — पर्यावरण और जलवायु ────────────── 🌡️ 2025 सबसे गर्म साल की सूची मे, नई रिपोर्ट से कुछ सवाल 📊 Future Earth, The Earth League और WCRP की "10 New Insights in Climate Science 2026/27" रिपोर्ट के अनुसार, 2025 औद्योगिक-पूर्व काल से करीब 1.43°C ज़्यादा गर्म रहा। 🏭 इसी साल जीवाश्म ईंधन और सीमेंट उद्योग से रिकॉर्ड 38.1 अरब टन CO2 उत्सर्जित हुई। WMO के अनुसार 2015-2025, अब तक के 11 सबसे गर्म वर्षों में गिने जाते हैं। 🌊 समुद्र लगातार नौवें साल सबसे गर्म स्तर पर है, करीब एक-तिहाई महासागर अपने तीन सबसे गर्म दौर में है। समुद्र-स्तर बढ़ने की रफ़्तार बीते 30 सालों में दोगुनी हो चुकी है। 💧 दुनिया की करीब तीन-चौथाई आबादी उन 101 देशों में रहती है जहाँ 2002 से मीठा पानी लगातार घट रहा है। गंगा, साबरमती और सिंधु जैसी नदियाँ इसी दबाव के बड़े केंद्र बताई गई हैं। ⚖️ सबसे अमीर 10% लोगों ने औसत व्यक्ति से करीब 7 गुना ज़्यादा योगदान भीषण गर्मी बढ़ाने में दिया, जबकि असर सबसे ज़्यादा ग़रीब, उष्णकटिबंधीय इलाक़ों पर पड़ता है। 📉 मौजूदा राष्ट्रीय प्रतिबद्धताएँ 2035 तक सिर्फ़ 12% उत्सर्जन कटौती का वादा करती हैं, जबकि 1.5°C सीमा के लिए करीब 55% कटौती चाहिए। 🪞 यहाँ असली बात पकड़ में आती है। जलवायु विज्ञान दशकों से एक ही बात दोहरा रहा है, आँकड़े, मॉडल, चेतावनी, यह सब मौजूद है। तो समस्या जानकारी की कमी नहीं है। 💭 जो कमी है, वह नीयत की है। देखना बहुत पहले हो चुका है, उत्सर्जन के स्रोत का हिसाब, किसका कितना योगदान, कहाँ असर पड़ रहा है, यह सब सामने है। पर देखने के बाद जो चुनाव करना था, अपने ही उपभोग की दिशा बदलने का, वह चुनाव अब तक नहीं हुआ। ⚙️ और यही अहंकार का पुराना खेल है, जो व्यवस्था, जो पहचान, जो सुविधा "मुझसे" जुड़ी है, उसे बचाए रखना, आत्म-रक्षण की प्रवृत्ति से। ❓ जलवायु विज्ञान का "देखना" तो वर्षों से मौजूद है, पर मेरे भीतर वह "नीयत" कहाँ खड़ी है, अपनी ही खपत और पकड़ को बदलने की? A) देखा तो है, पर नीयत अभी नहीं बनी B) नीयत भी बनती है, पर पकड़ छूटते ही टूट जाती है C) हमारी नीयत सुधार की नहीं, भोग की है। D) अब गीता सत्रों की माध्यम से ख़ुद की नीयत को भी देख रहा हूँ। 🌐 स्रोत: https://www.downtoearth.org.in/climate-change/climate-damage-cost-up-to-4-times-higher-as-15c-overshoot-risks-grow-report















































