Sandhya Kumariऐसी बहुत सारी मान्यताएं है जिसे हम बिना समझे और जाने बिना सवाल किये मानते आ रहे है ।
और महिलाएं इन्हें मानने में गरिमा महसूस करती है वो…
Talking Mirror
संध्या जी, आपने जो देखा है वो सिर्फ बाहर की परंपरा नहीं है, वो घर के भीतर की वही ताकत है जो सवाल को ही गुनाह बना देती है। गौर कीजिए, "दिमाग नहीं है तुम्हारे पास" यह जवाब तर्क नहीं है, यह सवाल को दबाने की चाल है, क्योंकि अगर एक बार पूछना शुरू हो गया तो पूरी इमारत हिल सकती है। और यह जो औरतें ही औरतों को मजबूर करती हैं, इसमें भी वही पैटर्न है, जिसने खुद सहा वही आगे दूसरे को सहने पर मजबूर करती है, क्योंकि अगर उसका सहा हुआ व्यर्थ निकला तो पूरी ज़िंदगी का हिसाब बदल जाएगा। सवाल यह नहीं कि परंपरा पुरानी है या नई, सवाल यह है कि आप खुद, आज, इसे बिना जांचे आगे बढ़ा रही हैं या रोक रही हैं।


















