
संयोग की बात है कि आज आचार्य जी का जन्मदिन भी है और आज ही मुझे संस्था में काम करते हुए पूरे एक साल हो गए हैं। ❤️🔥😍🎊🙇🔥🪖 मैं संस्था के IT विभाग में काम करता हूँ। इस एक साल की छोटी-सी अवधि में ही मुझे यहां बहुत कुछ मिला है। उसी से अवलोकन के रूप में कुछ बातें आपसे साझा करना चाहता हूँ। संस्था में आने से पहले मेरे मन में कई तरह के प्रश्न उठते रहते थे। संस्था और यहां के काम को लेकर एक छवि थी। वो टूटी है और अब शायद मैं थोड़ी बेहतर स्थिति में हूँ कि उन प्रश्नों के उत्तर दे सकूँ और ये उत्तर बाकी प्रतिभागियों के लिए भी उपयोगी हों। ------- ❓ प्रश्न 1: संस्था क्यों ज्वाइन करें? सत्र तो सुन ही रहे हैं! बुक स्टॉल भी लगा लेते हैं। डोनेट भी कर ही देते हैं। फिर संस्था ज्वाइन क्यों करनी है? मेरा अवलोकन: आचार्य जी ने कई बार कहा है कि संस्था एक व्यवस्था के अनुसार काम करती है। वह व्यवस्था स्वयं आचार्य जी ने बनाई है। कल के VBC सत्र में भी उन्होंने बताया कि वे और उनकी बनाई हुई प्रक्रिया अलग-अलग नहीं हैं। हमें अक्सर यह भ्रम होता है कि हम बाहर रहकर भी संस्था की मदद कर सकते हैं। हाँ, आर्थिक सहायता तो निश्चित रूप से की जा सकती है, और जितना संभव हो उतना करते भी रहना है लेकिन साथ ही साथ ये भी याद रहे कि ये मिशन बिना जुझारु योद्धाओं के आगे नहीं बढ़ सकता। कोई भी युद्ध बिना योद्धाओं के कैसे लड़ा जा सकता है? युद्ध न हथियारों के बिना लड़ा जा सकता है और न ही योद्धाओं के बिना। पूरी दुनिया में यह एकमात्र ऐसी जगह है जहाँ न पर्याप्त संसाधन हैं और न ही पर्याप्त योद्धा। फिर भी केंद्र में एक ऐसे व्यक्ति बैठे हुए हैं जिन्होंने इन सबकी कमी के बावजूद पूरी दुनिया की लोकधर्मी व्यवस्था के खिलाफ एक बहुत बड़ा युद्ध छेड़ दिया है—और जिनकी ज़िद के आगे इतिहास भी चुप हो जाता है। वे रोज लहूलुहान होते हैं। जिन्होंने कल का VBC सत्र सुना होगा उनके लिए अब ये समझना मुश्किल नहीं होगा। 60M subscriber होने पर लोकधर्मी क्या-क्या उपक्रम नहीं करते। यहां उन्होंने उसका तथ्य बता दिया, बता दिया कि वो हमें क्या देते आ रहे हैं और हम उनके साथ क्या करते हैं। 😑 क्या आपको नहीं लगता कि कम से कम आप उस भीड़ का हिस्सा न माने जाएं जो दूर से गीता का सम्मान करने का तो बढ़िया ढोंग कर लेती है मगर जब पास आकर जूझने की बात हो तो 50 बहाने तैयार होते हैं! सिर्फ Acharya Ji, I Love You बोलेंगे या Acharya Ji, I will fight along with you भी कहेंगे? 🔥💪 मानवता के इतिहास में क्या कोई ऐसा प्रेमी हुआ है जो पहले आपको खींच कर, डांट डपट कर, सहला कर, लोट पोट तरीके से हंसा हंसा कर सत्य से प्रेम करना सिखाता हो और फिर उस प्रेम को परखने के लिए कुरुक्षेत्र भी देता हो? इसके बाद भी क्या कोई दुर्योधनों की मालिश करने का चुनाव करके रह सकता है? ------- 🎭 प्रश्न 2: लेकिन संस्था में जीवन तो बेरंग हो जाएगा! यहाँ सब कुछ रुखा-सूखा और बंजर-सा ही होगा? मेरा अवलोकन: यह प्रश्न मुझे भी कुछ समय तक परेशान करता रहा था। लेकिन इसमें मेरा ही स्वार्थ छिपा हुआ था। मैं शरीर के प्रति लापरवाह और आलसी था। आचार्य जी कहते हैं — “शरीर के लिए व्यायाम और मन के लिए अध्यात्म।” इस समय मैं एक प्रोफेशनल कोच से बैडमिंटन सीख रहा हूँ और अच्छी प्रगति कर रहा हूँ। दिन भर पूरी तल्लीनता से काम करो और फिर रात में खेलो। अरे साहब, जो लोग 11 बजे कंबल ओढ़कर सो जाते हैं, वे क्या जानें कि रात 1 बजे रैकेट चलाने का मज़ा क्या होता है! 🤩❤️🔥 आपने PAF का होली सेलिब्रेशन तो देखा ही होगा। मैंने यहाँ आकर पहली बार किसी स्किट में रोल किया — और वह भी झुन्नू-पत्नि धनिया का। 💃 इतनी सहजता थी कि मुझे लगा ही नहीं कि यह पहली बार है। अपने प्रति, अपनी पहचान के प्रति मान्यताएं टूटीं। बहुत मज़ा भी आया और बहुत कुछ सीखने को भी मिला। 🤟😎 तो ऐसा बिल्कुल नहीं है कि संस्था आपके जीवन को बेरंग बना देती है। बल्कि यहाँ आकर आप वास्तव में रंग जाते हैं — संघर्ष और प्रेम के रंग में। संसारी खुल कर जिंदगी के मजे भी नहीं लेता। बस ऊपर ऊपर से छप छप करता है। 🤡 ------- 🙉 प्रश्न 3: लेकिन घरवालों, परिवार, रिश्तेदारों या साथ काम करने वाले लोगों को क्या कहें? कि मैं एक NGO में काम करने जा रहा हूँ? मेरा अवलोकन: जब मैंने पहली बार घर पर और अपने उस समय के ऑफिस में बताया कि मैं अपनी कॉरपोरेट नौकरी छोड़कर संस्था ज्वाइन करने वाला हूँ, तो पहली प्रतिक्रिया स्वाभाविक रूप से विरोध की ही थी। कुछ लोगों ने तो यह भी कहा कि यह मेरे करियर का सबसे घातक निर्णय है। 🤡 लेकिन संस्था ज्वाइन करने को लेकर मेरे भीतर जो स्पष्टता थी, वही मुझे इन प्रतिक्रियाओं से अप्रभावित रखने के लिए काफी थी। ☺️ आज वही लोग मेरे #WorkAtPAF वाले स्टेटस देखते हैं, लाइक करते हैं और बात करने के लिए मैसेज करते रहते हैं। अगर कोई बाहरी व्यक्ति आपको संस्था ज्वाइन करने से रोक पा रहा है, तो सीधी बात है — आपका ब्रांड अभी बहुत कमजोर है। आचार्य जी के शब्दों में एकदम लुचुर - पुचुर है। और अगर आपको सचमुच काम से, गीता से प्रेम है और गीता मिशन का महत्व समझ में आता है, तो बाहरी विरोध इतना बड़ा मुद्दा नहीं होना चाहिए कि उस पर बहुत सोचा जाए। सीधी बात है — मुझे सत्य से प्रेम है, गीता से प्रेम है और गीता मिशन में काम करना है। बस, बात खत्म। 💪 असल में बाहर हमने अपने बहुत सारे स्वार्थ खड़े कर रखे होते हैं। सुविधा के अनुसार अपना काम, अपने सहकर्मी और अपना परिवेश चुन लेते हैं, और फिर कहते हैं कि हम तो फँसे हुए हैं। यकीन मानिए, संस्था में काम करना Google, Apple, Amazon या Microsoft जैसे बड़े कॉरपोरेट में काम करने से कई गुना बेहतर अनुभव है। संस्था ऐसी जगह नहीं है जहाँ कामना-पूर्ति के प्रोडक्ट बनाए जाते हों और उनसे मुनाफा कमाया जाता हो। यहाँ प्रोडक्ट है — अहंकार का विलोप। और मुनाफा है — एक बेहतर और ऊँची ज़िंदगी, जिसमें तुच्छ और औसत चीजों के लिए कोई जगह नहीं होती। बताइए, ऐसा अवसर कोई देता है क्या? लेकिन संस्था के केंद्र में एक दिलदार व्यक्ति हैं, जो सब कुछ लुटाए दे रहे हैं। 🙇🥰 ------- 💻 प्रश्न 4: मगर यहाँ सीखने को मिलेगा क्या? बाहर तो बहुत करियर ग्रोथ है और नई-नई टेक्नोलॉजी हैं। (यह प्रश्न टेक्निकल फील्ड में काम करने वाले लोगों में ज्यादा होता है) मेरा अवलोकन: यह प्रश्न अक्सर उन्हें ज्यादा परेशान करता है जो कुछ साल कॉरपोरेट की चक्की में पिस चुके हैं (मैं भी उनमें से एक था)। 😝 इसका जवाब मैं नहीं दूँगा — आप स्वयं दे सकते हैं। जिस ऐप में आप यह अवलोकन पढ़ रहे हैं, थोड़ी देर रुककर उस ऐप को देखिए — गीता प्रतिभागी के नजरिए से नहीं, बल्कि एक प्रोफेशनल के नजरिए से। इतने कम संसाधनों में इतना उच्च दर्जे का ऐप — कैसे? न इसमें ads हैं, न इसमें कामनाओं को भड़काने वाली कोई जगह है। ऊपर से यमाचार्य भी आ जाते हैं, सो अलग! 🙏 लाइव सत्र, रिकॉर्डिंग, एग्जाम, और प्रतिभागियों को लगातार जोड़कर रखने के लिए अवलोकन साझा करने की सुविधा — और यह सब उपयोगकर्ता अनुभव (User experience) से बिना कोई समझौता किए। आपने ऐप के पिछले अपडेट को भी खूब सराहा था। क्या आप नहीं चाहेंगे कि आप इस क्रांति का हिस्सा बनें — सिर्फ मूक दर्शक बनकर न रहें? और संस्था में सिर्फ ऐप डेवलपमेंट का विभाग नहीं है। आपकी गीता परीक्षा जिसके विषय में कल ही सत्र में आचार्य जी ने बताया कि "आप वालंटियर करिए। आपको कुछ गड़बड़ लग रहा है तो आइए, बेहतर करिए। संस्था आपकी है।" इसके अलावा आपके काउंसलर (आउटरीच विभाग), पुस्तकें, कंटेंट, यूट्यूब, सोशल मीडिया इत्यादि विभाग भी हैं जहां आप अप्लाई कर सकते हैं। ------- ✨ सही काम में जो आनंद है, वह दुनिया के किसी भी ऐशो-आराम में नहीं मिलता। #PAF_Pride
















































