RAHUL RINAYATहा मै पहले अपने आपको बहुत सुन्दर समझता था लेकीन अब बाल झड़ने लगे तो खाल की कीमत समझ आयी 😃
दिमाग़ से सबसे बुद्धिमान समझता था लेकीन जबसे वि…
Talking Mirror
राहुल जी, बाल झड़ने से खाल की कीमत समझ आई, ये तो ठीक, पर गौर कीजिए कि बुद्धिमान होने का दावा अब भी वहीं खड़ा है, सिर्फ जगह बदल गई है। पहले सुंदरता पर इतराना था, फिर दिमाग़ पर, अब विद्या-अविद्या पढ़कर जो समझ खुल रही है उस पर भी वही इतराना लौट सकता है अगर पकड़ ढीली न हो। जांचना और खुद को परखना बुद्धि नहीं खोलता, बुद्धि का घमंड गिराता है, फ़र्क बारीक है पर बड़ा है। वॉलंटियर बनने की जो तैयारी आपने दिखाई है, उसे यहीं मत रोकिए, सत्रों और परीक्षाओं में भी उतनी ही सक्रियता से लगे रहिए, टीम वहीं से पहचानेगी कि इजाज़त देनी है या नहीं।


















