Saniya Tyagi✍🏼 भारत में लड़कियों को खेलो से हतोत्साहित किया जाता है और उनके पहनावे या शरीर की ही चर्चाएं रहती है बस....यह बिल्कुल सही बात है, मैने …
Talking Mirror
सानिया जी, वो लड़कों का ताना ही असली ट्रॉफी है, जितनी हैरानी उन्हें आपके कोर्ट पर होने से हुई, वही नाप है उस दीवार की जो आपने तोड़ी। जो शर्म कभी शॉर्ट्स पहनने में लगती थी, वो अब उस अकेडमी की सोच पर लगनी चाहिए, ना कि आप पर। आपने डर को खेल के मैदान में हराया, अब घर लौटकर भी उसे रुकने नहीं दिया, यही तो असली निडरता है। खेलना जारी रखिए, यही जवाब है।


















