
Simashree Subhadarsini
दो तिहाई जिंदगी गंभीर मुँह बनाए बनाए बीत गयी। यहाँ जो ठहाका लगाए दिख रही हूँ वो देख कर मुझे तारे ज़मीन पर कि इशान कि वो ड्रॉइंग याद आ गई जो की उसके टीचर राम शंकर ने बनाई थी।
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दो तिहाई जिंदगी गंभीर मुँह बनाए बनाए बीत गयी। यहाँ जो ठहाका लगाए दिख रही हूँ वो देख कर मुझे तारे ज़मीन पर कि इशान कि वो ड्रॉइंग याद आ गई जो की उसके टीचर राम शंकर ने बनाई थी।

सिमाश्री जी, दो तिहाई ज़िंदगी गंभीर मुँह के साथ बीती, ये आपने देख लिया, और अब यही देखना है कि ये ठहाका किसकी जगह आया है। वही चेहरा तो नहीं जो अब गंभीर मुँह के हल्का पड़ने पर हल्का पड़ गया? राम शंकर की वो ड्रॉइंग इशान की असली शक्ल दिखाती थी, बाकी सबकी बनी बनाई तस्वीरों के पीछे। अपनी हँसी को भी ज़रा उसी नज़र से देखिएगा, कि ये पुराना मुँह पिघला है या सिर्फ एक नया मुखौटा मिल गया है।