
अभी 4-5 दिन पहले परिवार में चाची को सर्प ने डस लिया ये ख़बर सुनकर चाचा जी पापा को मंदिर से ही अपने साथ ले गए पापा रोज मंदिर जाते हैं तो वह तौलिए(बिना कपड़े पहने हुए) में ही जाते है उस दिन भी वह तौलिए में ही मंदिर गए थे ओर वही से चाची को झाड़ फूक के लिए पास के गांव ले गए लेकिन अपने मन से नही बल्कि चाचा जी के कहने पर। जब पापा वहा से आए तो मैने उन्हें तौलिए में देखकर तुरन्त ये अनुमान लगाया कि ये अपनी मर्जी से जानबूझकर तोलिए में गए पापा ने कपड़े पहनना भी उचित नहीं समझा अंधविश्वास को बढ़ावा देने के लिए वगैरा वगैरा .... क्योंकि मेरे पापा झाड़ फूक में विश्वास रखते हैं ऐसा मैने सोचा, लेकिन मैने सही बात जानने की कोशिश किए बिना ही ये अनुमान लगा लिया सही बात जानने की कोशिश नही की।



















