
Deepak Raj
क्या एक ही अहंकार कभी लोभ, कभी डर, कभी आकर्षण को अपने फैसलों का आधार बना रहा है?
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क्या एक ही अहंकार कभी लोभ, कभी डर, कभी आकर्षण को अपने फैसलों का आधार बना रहा है?

दीपक जी, यही वह जगह है जहाँ असली जाँच शुरू होती है। विकल्प चुन लेना आसान है, पर सवाल अपने आप से पूछना बाकी रह जाता है — आज सुबह जो फैसला लिया, वह लोभ से निकला या डर से, या सच में समझ से? किसी एक घटना को उठाइए, जहाँ फैसला तुरंत लिया गया था, और देखिए कि उस वक़्त भीतर कौन बोल रहा था। जवाब 'हाँ' में देना उतना काम का नहीं जितना यह देखना कि कौन सा सिर, किस मौके पर, आपके नाम से फैसला ले रहा है।