
DEEPAK NEUPANE
जानते कुछ नही (लेकिन अज्ञान मे PHD करी हुई है) अपनी ही अज्ञान की कल्पनाको ज्ञान कहेते है हम (मोटे मैं) AP के साथ अवलोकन
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जानते कुछ नही (लेकिन अज्ञान मे PHD करी हुई है) अपनी ही अज्ञान की कल्पनाको ज्ञान कहेते है हम (मोटे मैं) AP के साथ अवलोकन

दीपक जी, यह जो देखा है वह बहुत साफ़ है - कि अज्ञान को ही ज्ञान समझ लेना, और उस कल्पना पर गर्व करना, यही 'मोटे मैं' का असली खेल है। अब इसे अपने ऊपर उतार कर देखिए: आज किस विषय में आपने यह मान रखा है कि आप जानते हैं, जबकि असल में वह सिर्फ़ एक धारणा है जिसे आपने कभी चुनौती ही नहीं दी? यह देखना किताबी बात नहीं रहेगी, जिस क्षण आप अपनी किसी पक्की मान्यता को पकड़ेंगे और पूछेंगे - यह ज्ञान है या सिर्फ़ पुरानी आदत जिसे मैंने ज्ञान का नाम दे दिया है।