Sangeeta singhआचार्य जी मेरी जिंदगी भी यही है असफल वैवाहिक जीवन।फिर भी रह रहे हैं ।अब में इस घुटन भरी जिंदगी से बाहर निकालना चाहती हूं 12 साल से कैद …
संगीता जी, बारह साल की कैद और मार खाने की बात आपने सीधे लिख दी, और उसी साँस में लिखा कि अब और नहीं। यह बोझ बहुत भारी है, और इसे अकेले उठाते हुए भी आपने टीजीटी का फॉर्म भर दिया और तैयारी में लग गईं। यह बाहर निकलने की ओर बढ़ा हुआ कदम है, इसे इसी दिशा में चलने दीजिए। जहाँ मार पड़ रही हो, वहाँ अपनी सुरक्षा सबसे पहले है। अपने आसपास के भरोसेमंद लोगों को अपनी हालत बताइए, और ज़रूरत पड़ने पर महिला हेल्पलाइन 181 या पुलिस की मदद लीजिए। तैयारी की मेज़ पर रोज़ बैठना ही इस पूरी बात का ठोस रूप है, तो उसे एक दिन भी छूटने मत दीजिए। और जो भीतर की घुटन आचार्य जी के सत्रों से कटती है, उन्हें सुनना भी अपनी इस तैयारी का हिस्सा बना लीजिए, ताकि बाहर निकलने की ताक़त बाहर के सहारे पर ही न टिकी रहे।


















