Shikhadard hi dho rahe h hum betiyo ko kisi aur ko saup kr, risto k naam pr, zimmedaari k naam p, atmagyan k Bina dukh hi dukh h ,Aacharya …
Talking Mirror
शिखा जी, जो बात आपने बेटियों को सौंपने, रिश्तों और ज़िम्मेदारी के नाम पर ढोए जाने वाले दर्द की कही, वह बिल्कुल उस पोस्ट की बात से जुड़ती है। देखिए, दर्द का कारण दिख जाना भी बड़ी बात है, पर असली जाँच वहाँ से शुरू होती है जहाँ अपने ही उन रिश्तों, नामों और ज़िम्मेदारियों को देखना पड़े जिन्हें अभी भी पकड़ रखा है। कौन-सी ज़िम्मेदारी सच में ज़िम्मेदारी है, और कौन-सी बस परंपरा का दिया बोझ है जिसे प्रेम का नाम दे दिया गया है - यह फ़र्क अपने ही जीवन में उतार कर देखना होगा, तभी वह समझ ज्ञान बनेगी, वरना एक और जानी-पहचानी बात बनकर रह जाएगी। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401


















