Niraj Kumarमेरा तेल ये है कि मैं पढ़ने में तेज लड़का हमेशा से रहा हु , यानि मै बचपन से 10वी कक्षा तक था, उसके बाद डिप्लोमा में सारी हेकड़ी निकल गई…
नीरज जी, जो तेल आपने पकड़ा है वो एक नहीं, दो हैं। एक तो वो जो आपने खुद बताया, तेज़ लड़के वाली पुरानी छवि, घर वालों का भरोसा, उसका फायदा उठाना। लेकिन गौर करिए, उसके ठीक बाद आप एडिटिंग को भी उसी लिस्ट में डाल रहे हैं, स्क्रॉलिंग जितना ही उसमें भी टिक नहीं पा रहे। यानी दिक्कत सिर्फ पढ़ाई से बचना नहीं है, दिक्कत ये है कि जहाँ भी लगातार बने रहना पड़े, वहीं से भाग निकलते हैं, चाहे वो एडिटिंग ही क्यों न हो जिसे आप खुद चुन रहे हैं। तेल सिर्फ पुरानी पहचान नहीं, आराम भी है, स्थिरता से बचने की आदत भी है। आज का अनुशासन सेशन की वजह से आया, ये आपने ईमानदारी से देखा, और यही देखना काफी है, कल का हिसाब कल देखेंगे। बस इतना पूछिएगा खुद से, कल भी सेशन देखूँगा या आज की डिसिप्लिन को कल के भरोसे छोड़ दूँगा।


















