
A and C कभी जब नौकरी के लिए इंटरव्यू में जाता या परीक्षा का पेपर देने जाता तो मुझे दोस्तों को दिखाना पड़ता है कि मैं आश्वस्त हूं और कभी कुत्ते से सामना होता है तो मैं अपने डर को भगाने के लिए कुत्ते पर चिल्लाता हूं
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A and C कभी जब नौकरी के लिए इंटरव्यू में जाता या परीक्षा का पेपर देने जाता तो मुझे दोस्तों को दिखाना पड़ता है कि मैं आश्वस्त हूं और कभी कुत्ते से सामना होता है तो मैं अपने डर को भगाने के लिए कुत्ते पर चिल्लाता हूं

अनुपम जी, आपने खुद ही दोनों जगह एक ही चीज़ पकड़ी है - इंटरव्यू में दोस्तों के सामने आश्वस्त दिखना और कुत्ते पर चिल्लाना, दोनों में डर मौजूद है, बस दिशा बदल जाती है। दोस्तों के सामने डर को छुपाया जाता है, कुत्ते के सामने उसे आवाज़ में बदलकर बाहर फेंका जाता है। दोनों ही बार असली सवाल डर का मिटना नहीं था, बल्कि यह था कि कमजोर न दिखें, न खुद को, न दूसरे को। अगली बार जब परीक्षा या इंटरव्यू से पहले घबराहट उठे, उसे दबाकर कॉन्फिडेंस का मुखौटा लगाने की बजाय सिर्फ देखिए कि वह घबराहट क्या कह रही है, उसे ढकने की जल्दी किए बिना।