
1. सिमोन द बोउवार (Simone de Beauvoir) का प्रसिद्ध वक्तव्य - “स्त्री पैदा नहीं होती, बल्कि उसे स्त्री बनाया जाता है।” यह बात बिल्कुल सही है। लोकधर्म तो हर देश में है और प्रचुर मात्रा में है लेकिन भारत में जो लोकधर्म है वह स्त्रियों के लिए बहुत घातक है। भारत में लोकधर्म का असर न सिर्फ स्त्रियों की दुर्दशा, मनो दसा पर है बल्कि आर्थिक सामाजिक राजनीतिक क्षेत्रों को भी प्रभावित करता है। जहां धर्म होना चाहिए था सर्वांगीण विकास बिना किसी भेद के चाहे वह स्त्री हो या पुरुष लेकिन ऐसा नहीं है। लोक धर्म ने धर्म का चोला पहन लिया और धर्म के नाम पर सब विकृत कर दिया जिस कारण भारतीय स्त्री हर क्षेत्र में पिछड़ी हुई नजर आती है। और कई जगह तो नजर ही नहीं आती। भारतीय लोकधर्म स्त्रियों को बताता है कि तुम्हारी जगह घर में है पति को खुश रखो बच्चों को देखभाल करो बड़ों की देखभाल करो। शादी एक ऐसी स्थिति भी हो सकती थी जहां दो लोग एक साथ बढ़कर एक दूसरे का साथ दे सकते थे लेकिन शादी सबसे बड़ी आफत बन गई यहां शादी का मतलब यह होता है कि पुरुष जितना ज्यादा हो सके स्त्री को घर पर रोक सके। कपड़े जो एक स्वतंत्र निर्णय होना चाहिए था उसे भी धर्म से जोड़ दिया और घूंघट जैसी कुप्रथाएं प्रचलित हो गई। जो स्त्री अपने ही घर में घूंघट करने लग जाए वह भला अपना विकास कैसे करेगी। स्त्रियों के जहन में डाल दिया गया है कि वह खाना पूरे घर को खिलाकर ही खाए जैसा भी बचा हो। भारत में अधिकांशत स्त्री को इंसान समझा ही नहीं जाता। वह बस एक भोग्य वस्तु है या बच्चे पैदा करने वाली मशीन। 2️⃣ आचार्य जी शरीर को अहंकार की पहली कॉलोनी क्यों कहते हैं? उत्तर - आचार्य जी शरीर को अहंकार की पहली कॉलोनी इसलिए कहते हैं कि जब अहंकार के पास कुछ भी ना हो कोई भी ना हो पर अपना शरीर तो होता ही है। 3. हां अब खेलों के लिए प्रोत्साहित तो करते हैं पर पर खेलने के लिए बहुत ही काम लड़कियां खेलने पहुंचते हैं। मैं भी खेलना भूल चुकी थी, मैं भी मान लिया था कि खेलना मेरे जीवन में है ही नहीं। फिर आचार्य जी आए जीवन में और सब बदल गया अब मैं खेलती हूं खुलकर खेलती हूं। आचार्य जी को सुनने के बाद जीवन में पहली बार स्विमिंग करने गई और मैं अच्छा सीख रही हूं। वह भी मेरे बच्चों के साथ। मैं उन्हें अच्छा कंपटीशन देती हूं। उनकी पहली कोशिश होती है मुझे हरण जो कि इतना आसान नहीं होता। कई बार वह जीत जाते हैं कई बार मैं जीत जाती हूं । मजा आ जाता है।

































