Priyanshi Yadavबहुत सारी जगहों पर जैसे कि हम किसी भी विषय के बारे में गहराई से नहीं सोचते है न ही जानने की कोशिश करते है बस ऊपर ऊपर से देख लेते है।हम …
Talking Mirror
प्रियांशी जी, यही जो एक जग पानी के लिए पूरी मोटर चला देना है, गौर करने वाली बात ये है कि मेहनत बचाने का हिसाब एक पल में हो जाता है, दिमाग तुरंत गणना कर लेता है कि हाथ से भरना कितना थका देने वाला है। लेकिन बाल्टी भर पानी जो बहा, उसका हिसाब कभी नहीं होता, वो नज़र में ही नहीं आता। सुविधा का हिसाब तुरंत बैठता है, कीमत का हिसाब कभी बैठता ही नहीं, क्योंकि उसे बैठाने वाला कोई है ही नहीं। यही वो जगह है जहाँ आराम गिनती में आता है और नुकसान गिनती से बाहर रह जाता है।


















