मुझे लगता हैं कि खालीपन, कोतूहल और मोबाइल दोनों ही जिम्मेदार हैं । पहले हम अभिभावक मोबाइल देखते हैं और बच्चा हमारा अनुसरण करना चाहता हैं । हम पालन की जिम्मेदारी से बचने के लिए टालने पर उतर आते हैं और टीवी मोबाइल का सहारा लेते हैं, फिर जिस तरह हम उस छोटे लेकिन तत्काल डोपिमिन के अधीन हो जाते हैं , बच्चे भी हो जाते हैं। मैने देखा कि एक छोटे कैफे मे माँ बाप दोनों ही ऑर्डर करने काउंटर पर पहुंच गए और बच्चे को मोबाइल के साथ टेबल पर अकेले बिठा दिया। बच्चा करीब 3 साल का था । मोबाइल की आवाज बिल्कुल तेज़ और बच्चा कार्टून मे मगन। बाकी आस पास सबका शांतिपूर्वक खाना हो गया दूभर। अगर मोबाइल नहीं होता तो माँ बाप क्या इतने गैर जिम्मेदार होते कि बच्चे को अकेला छोड़ कर दूसरी तरफ दूर काउंटर की ओर मुंह किए ऑर्डर कर रहे होते। अगर कोई मोबाइल संग बच्चा ले जाता तो न बच्चा कुछ बोलता न मोबाइल। बेहोशी का एक कारण हम और हमारी व्याकुलता हैं और दूसरा कारण बिना मेहनत के घर बैठे मिलने वाला डोपिमिन हिट हैं । बच्चे हों या बड़े सब इन्हीं से ग्रस्त हैं ।



















