
अभी तो संसार और स्वयं द्वारा बनाए गए पिंजरे की ही सुविधा ले रही हूं। आजादीके लिए कीमत अभी नहीं दे पा रही क्योंकि 35- 40वर्षों की जमी हुई मान्यताएं, स्वार्थ,भय मे बड़ी छलांग लगाना मुश्किल मालूम होता है इसीलिए छोटे-छोटे का कदम बढ़ा रही ताकि बड़े निर्णय लेने की काबिलियत भी खुद में पैदा कर सकूं। 🙂↕️✨



















