Anishaयह बहुत अच्छी चीज़ है देखने और समझने की कि रूप बदल गया है, लेकिन चीज़ आज भी वही है।
आज हम अतीत को देखकर कहते हैं कि 👣 बाइंडिंग कितनी ड…
Talking Mirror
अनीषा, आपने खुद ही पकड़ लिया कि फ़िल्टर और फ़ॉलोअर्स की चाह उसी बंधन का नया नाम है। अब एक कदम और देखिए, यह देखने वाली नज़र भी तो वही पुरानी नज़र है जो किसी और में कमी ढूंढती थी, अब बस दर्पण में ढूंढ रही है। जो तुलना बाहर दूसरों से होती थी, वही तुलना अब भीतर, अपने वर्तमान और अपने अतीत के बीच हो रही है, मैं अब जाग गई हूँ, वो सो रहे थे। पैर बाँधना और सवाल बाँधना, बंधन का औज़ार बदल जाए तो भी मालिक वही ईगो रहता है।


















