
Amrita singh
उसे गलत साबित करने के लिए जवाब ढूंढने लगती हूं
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उसे गलत साबित करने के लिए जवाब ढूंढने लगती हूं

अमृता जी, यह देखिए कि जवाब ढूँढ़ना कितना स्वचालित है — मान्यता को चुनौती मिलते ही मन पहले यह नहीं पूछता कि बात सही है या गलत, वह सीधे बचाव में उतर जाता है। यही रक्तबीज की गति है, चोट लगते ही नया तर्क खड़ा हो जाता है। असली सवाल जवाब ढूँढ़ने को रोकना नहीं, बल्कि यह देखना है कि किस चीज़ को बचाने के लिए यह इतनी फुर्ती से हो रहा है। अगली बार जब कोई तर्क मान्यता को हिलाए, उस पहले झटके में रुककर देखिए कि वहाँ डर किस पहचान के खोने का है। वह देखना ही जवाब ढूँढ़ने से ज़्यादा ज़रूरी है।