Priyanka Kumar sawइसमें मैं क्या कहूं जब से आचार्य जी को सुन रही हूं तब से मैं समझ पा रही हूं कि धारण कैसे इंसान पकड़ कर बैठा है पुरानी धारणा है ना और को…
Talking Mirror
प्रियंका जी, आपने लिखा कि जो सवाल उठाता है उसे लोग पागल भी बोल सकते हैं। ज़रा इसी को थोड़ा और खोलिए, वो डर किसका है जो भीतर से यह मानने से रोकता है कि पुरानी धारणा गलत हो सकती है, क्या वो डर लोगों के पागल बोलने का है, या खुद अपनी बरसों पुरानी समझ को गलत मान लेने का। टोपी को अजगर मान लेना जितना डरावना है, टोपी को टोपी मान बैठे रहना उससे कहीं आसान लगता है। आचार्य जी को सुनते हुए यह जो साफ़ दिखने लगा है, उसे रोज़ की सीखने की जगह पर बनाए रखिए, वही असली उम्र बढ़ना है। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401


















