
Rishikesh session reflection- थोड़ा late reflection लिख रही हूं क्योंकि अभी भी travelling कर रही हूं। मैं चेन्नई में रहती हूं। ऋषिकेश में सत्र से 1 हफ्ते पहले तक पता भी नहीं था कि यहां आउंगी। सत्र से 2 दिन पहले ही मैं ऋषिकेश पहुंच गयी। Volunteering का form पहले ही भर दिया था। PAF team से मिली, काम assign हुआ। जिंदगी में पहली बार रातें बस 1 घंटा या सोई ही नहीं एसे गुजरीं। पर एक बात कहूं शरीर थक गया था। इतना थका कि मैं खड़ी भी नहीं हो पा रही थी पर इतना मजा आ रहा था मैं इस बात को शब्दों में नहीं पिरो सकती। लग रहा था युद्ध में हूं। वो 3 दिन पलक झपकते कैसे बीत गये पता ही नहीं चला। Volunteering करने पर बहुत कुछ सीखने को भी मिला। गलतियां भी की पर next time से और अच्छा करुंगी। मैं luggage team में volenteer थी। Session समाप्त होने के बाद सब लोग luggage लेने आते हैं और ऐसे में हमें वहीं रहना पड़ता है ताकि लोगों को time से उनका luggage वापस मिल सके। मुझे लगा कि में इस बार आचार्य जी से नहीं मिल पाउंगी। सत्र का आखिरी दिन था ऋषिकेश में। Volenteers को एक नयी activity assign हुई। इसमें हमको आचार्य जी की books Cafe's में as a gift देनी थी ताकि वो books को अपने यहां display कर सकें। ये काम दिखने में तो बहुत आसान दिख रहा था पर ऐसा था नहीं। दोपहर में 12:30PM से हमने ये activity शुरु की, शाम होती गयी सत्र शुरु हो गया पर हम अभी तक अपना task complete नहीं कर पाये। वेसे तो PAF team ने areas divide कर दिये थे पर फिर भी बहुत समय लग गया। धीरे-धीरे करके सत्र समाप्त होने का समय करीब आने लगा। सत्र समाप्त होने के कुछ देर पहले ही हमारा काम खत्म हुआ और मेरे दिल की धड़कनें बढ़ने लगी। लगा आज भी आचार्य जी से नहीं मिल पाउंगी। पर मैंने सोचा कि में venue पर जाउंगी। हम जहां थे वहां से venue approx 12km था और हमारे पास समय बहुत कम। पर हम लोग जैसे-तैसे करके venue पर पहुंच गये। सत्र समाप्त हो चुका था और book signing शुरू हो चुकी थी। इतने सारे लोग आचार्य जी के आसपास खड़े थे कि लगा अब नहीं मिल पाउंगी। पर मैंने फिर से कोशिश की और चल पड़ी आचार्य जी की तरफ। कुछ समय बाद मैंने आचार्य जी को देखा वो बिल्कुल मेरे सामने खड़े थे। मैंने आचार्य जी को पूछा मैं आपको hug कर सकती हूं और आचार्य जी ने कहा हां। मेरा शरीर कांप रहा था। आचार्य जी से गले लग कर बहुत रोना आ रहा था। फिर मैंने आचार्य जी को धन्यवाद दिया। ये समय में कभी नहीं भूल सकती। बहुत कुछ सीखने को मिला अपनी कमियां दिखी। Thank you Acharya ji & PAF team ❤️❤️❤️






































