
ऋषिकेश में आचार्य जी संग भव्य शिविर: बोध का एक अनूठा उत्सव ऋषिकेश में आत्मज्ञान का एक अभूतपूर्व उत्सव देखने को मिला, जब तीन वर्षों के अंतराल के बाद आचार्य जी का दो-दिवसीय शिविर (25-26 अप्रैल) उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग स्वतंत्रानंद आश्रम पहुँचे, जबकि ऑनलाइन लाखों दर्शकों ने भी इन सत्रों में भागीदारी की- यह इसकी वैश्विक अपील को दर्शाता है। प्रातः 4:30 बजे के सत्रों में उमड़ी भीड़, गंगा तट पर संत कबीर के भजनों का सामूहिक गायन, और अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों की सक्रिय उपस्थिति ने इस आयोजन को एक जीवंत, वैश्विक और गहन आत्मचिंतन के मंच में बदल दिया। शिविर के दौरान कठोपनिषद और ऋभु गीता के गहन विवेचन के साथ आचार्य जी ने आत्मज्ञान, आंतरिक स्वतंत्रता और मानवीय संबंधों पर तीखे व प्रासंगिक प्रश्न उठाए। जलवायू परिवर्तन को अध्यात्मिक समस्या बताते हुए उन्होंने कहा- “अपने आप से मीठे झूठ बोलना पूरी दुनिया के लिए घातक है।” यह शिविर न केवल एक गहन चिंतन का आयोजन रहा, बल्कि हाल के वर्षों में ऋषिकेश के सबसे प्रभावशाली बौद्धिक-सांस्कृतिक समागमों में से एक बनकर उभरा। शिविर के तुरंत बाद, 27 अप्रैल को आचार्य जी ने AIIMS ऋषिकेश में छात्रों को संबोधित किया, जिसने भारत के प्रतिष्ठित संस्थानों में उनके प्रभावशाली संवाद-श्रृंखला को आगे बढ़ाया। सत्र के वीडियो आपके साथ जल्द ही साझा किए जाएंगे। 👉 सुबह के सत्र की एल्बम अब वेबसाइट पर उपलब्ध है: https://acharyaprashant.org/en/albums/bhagavad-gita-morning-rishikesh-2026-04-25_album-95618 👉 शाम के सत्र की एल्बम अब वेबसाइट पर उपलब्ध है: https://acharyaprashant.org/en/albums/bhagavad-gita-evening-rishikesh-2026-04-25_album-e346e










































