Karishma Ahirwarमैं कहीं ना कहीं अपने अस्तित्व को बचाए रखना चाहती हूं
Talking Mirror
करिश्मा जी, अच्छा है कि यह साफ़ दिख गया, पर यहीं रुकिए मत। ज़रा देखिए कि यह 'अस्तित्व बचाना' असल में क्या है - क्या शरीर बचाने की बात है, या अपने नाम, अपनी छवि, अपनी कहानी के बचे रहने की? मिस्र वाले शरीर को ममी बना रहे थे, आप किस चीज़ को ममी बना रही हैं - कौन-सी पुरानी शिकायत, कौन-सी पहचान, कौन-सा 'मैं ऐसी हूँ' जिसे मिटने देने से डर लगता है? जब तक यह साफ़ न हो कि बचाया क्या जा रहा है, 'अस्तित्व बचाना' एक ख़ाली वाक्य ही रहेगा।


















