
19 सितंबर को गोवा में दो-दिवसीय Weekend With Master शिविर के दौरान आचार्य जी के साथ 'वेदांत संहिता' सत्र का आयोजन हुआ। सत्र से पूर्व हर आयु वर्ग के लोगों ने आचार्य जी द्वारा विशेष रूप से तैयार की गई HIDP ऐक्टिविटीज़ में उत्साहपूर्वक भाग लिया। तत्पश्चात, कठोपनिषद के श्लोक पर चर्चा करते हुए आचार्य जी ने स्पष्ट किया कि केवल बौद्धिक चातुर्य, शास्त्रों का अध्ययन या केवल ज्ञान सुनने भर से आत्मज्ञान की प्राप्ति नहीं हो सकती। उन्होंने वेदांत को 'गंगोत्री' बताते हुए समझाया कि संसार की सभी ज्ञान और भक्ति की धाराएँ इसी मूल स्रोत से निकलती हैं; इसलिए बाहरी प्रतीकों और रस्मों में उलझने के बजाय मूल तत्व से जुड़े रहना आवश्यक है। आचार्य जी ने यह भी रेखांकित किया कि मनुष्य की सबसे बड़ी भूल स्वयं को अपूर्ण मानकर बाहर कुछ पाने की दौड़ में लगे रहना है। जब तक नीयत साफ़ नहीं होती और अहंकार की परतों को बिना किसी छुपाव के नहीं देखा जाता, तब तक कोई भी बाहरी उपाय कारगर नहीं हो सकता। स्वयं के बंधनों के प्रति ईमानदारी ही वास्तविक साधना है। सत्र की इन सीखों ने उपस्थित लोगों को आत्म-अवलोकन की एक नई दिशा दी। तस्वीरों में आप गोवा के इस सुंदर वातावरण में बिताए गए इन ख़ास पलों की झलकियाँ देख सकते हैं। यदि आप भी जीवन को गहराई से समझना चाहते हैं, तो Weekend With Master शिविरों का आयोजन सितंबर में हर सप्ताहांत गोवा में हो रहा है, और अक्टूबर में ये शिविर हर सप्ताहांत दिल्ली-एनसीआर में आयोजित किए जाएँगे।

























