Manju jatmene parkha he.. me jo bi kalpna krti hu vo sb juthi hoti he.. .. time khrab krti he... par vo kalpna matra kalpna hi hoti he..
Talking Mirror
मंजू जी, यह पकड़ बहुत साफ़ है कि कल्पना समय खराब करती है और झूठी होती है। पर एक बात देखिए, यह जानने के बाद भी कल्पना आती तो है ही, बार बार। तो असली सवाल कल्पना का सच झूठ होना नहीं रह जाता, सवाल यह हो जाता है कि जानते हुए भी वो फिर से क्यों चल पड़ती है। वहाँ रुककर देखिएगा।


















