
ऐसी बहुत सी जगह है जहां मै सीधे देखने के बजाय किसी और बात ध्यान करती हु और अपने आप को कोसती रहती हूं। ऊपर से इतना ज्यादा सोचने लगती हूं खुद को बीमार कर देती हूं। जबकि पता है ये अंहकार का एक तरह से भटकाने है। मै ये देख नहीं पाती इसके पीछे वजह क्या है। इसलिए किसी और बात पर ध्यान देने लगती हूं



















