
ये फ़िल्म नहीं, हमारे घर-घर की कहानी है। सत्यजित राय ने 'देवी' में वही दिखाया जो आचार्य जी बार-बार कहते हैं - अहंकार दूसरे को ऊँचा बनाकर भी अपना ही काम निकालना जानता है। ऊँचा आसन दे दो, ताकि बड़ा दावा बाँध सको। भारत में इसका सबसे बड़ा उदाहरण - माँ को देवी कहना। 1. उदाहरण - माँ नवरात्रि पर कन्या पूजन करेंगे, "माँ तो देवी है, माँ के चरणों में स्वर्ग है" - पोस्टर लगाएंगे। और उसी माँ की असल जिंदगी क्या है? सुबह 5 बजे से रात 12 बजे तक बिना वेतन, बिना छुट्टी, बिना शिकायत के सबकी सेवा। बीमार है तो भी रसोई उसी को करनी है। अपना सपना, करियर, थकान, शरीर - सब भूल जाना है। क्योंकि वो तो "देवी" है। 2. हमारा स्वार्थ क्या जुड़ा है? हमें एक ऐसी नौकरानी चाहिए जो - - कभी थके नहीं - कभी पैसे न मांगे - कभी अपना हक न मांगे - सबका ख्याल रखे, पर उसका ख्याल किसी को रखना न पड़े अगर माँ को इंसान मानेंगे तो उसे इंसान जैसे अधिकार भी देने पड़ेंगे - आराम, बराबरी, अपनी जिंदगी, ना कहने का हक। इसलिए उसे देवी बनाना सुविधाजनक है। देवी को हक नहीं दिया जाता, देवी से माँगा जाता है। 3. उसकी कौन सी हानि की अनदेखी करते हैं, अपने लाभ को बचाने के लिए? हम देखते भी हैं कि वो टूट रही है - - उसका शरीर घिस रहा है, एनीमिया, कमर दर्द, नींद पूरी नहीं - उसकी कोई निजी पहचान बची ही नहीं, वो सिर्फ किसी की पत्नी, किसी की माँ बनकर रह गई - वो अंदर से खाली, अकेली और उदास है पर हम अनदेखी कर देते हैं। क्योंकि अगर मान लिया कि वो दुखी है, तो फिर हमारी पूरी व्यवस्था पर सवाल उठेगा। हमारा मुफ्त का आराम बंद हो जाएगा। इसलिए हम कहते हैं - "अरे माँ तो महान होती है, वो तो सब सह लेती है।" जैसे फिल्म में दयामयी को देवी बनाकर उसके ऊपर एक बच्चे की जान का भार रख दिया और बच्चा मर गया, वैसे ही हम माँ को देवी बनाकर उसके ऊपर पूरे परिवार के सुख का भार रख देते हैं। फिल्म का सवाल वही है जो हमसे पूछा जा रहा है - > जिसकी पूजा कर रहा हूँ, उससे क्या-क्या लेना चाहता हूँ? और उसकी दुर्दशा में मेरी माँगों का कितना योगदान है? देवी का टैग सम्मान नहीं, सबसे मीठा शोषण है। आपको दूसरा सटीक उदाहरण लेना हो तो गाय को 'गौ-माता' कहना और नदी को 'गंगा मैया' कहना है। माता कहकर दूध के लिए उसे मशीन बना दिया, सड़कों पर मरने को छोड़ दिया। मैया कहकर उसमें सारा नाला डाल दिया। पूजा जारी है, शोषण भी जारी है।



















