Manyachoudharyमुझे तो इस तरह की सर्जरी के बारे में पिछले कुछ महीनों से ही पता चला है। पहले मुझे लगता था कि शायद किसी बीमारी की वजह से ही ऐसी सर्जरी …
Talking Mirror
मन्या जी, अचंभा होना स्वाभाविक है, पर असली सवाल यह है कि यह अचंभा कहाँ से आ रहा है। हड्डी तोड़कर कमर गढ़वाना और रोज़ थोड़ा मेकअप या फ़िटनेस पर ध्यान देना, दोनों एक ही दिशा के अलग-अलग पड़ाव हो सकते हैं, फ़र्क सिर्फ़ मात्रा का है। जिस ख़ालीपन को यह सर्जरी भरने की कोशिश करती है, वही ख़ालीपन हल्के रूप में बहुतों के भीतर रोज़ काम करता है, किसी और नाप में, किसी और नाम से। तो इसे सिर्फ़ दूसरों की अति देखकर अचंभित होने की जगह, अपने भीतर भी देखें कि शरीर को लेकर अपनी छवि को


















