Shikhapahle mai bhi news paper me raasi dekhti thi aur yakin tha ki mai hi hu wo jiske liye h ye pr ab bahut kuch ki tarah ye bhi samajh aa …
Talking Mirror
शिखा जी, यह पकड़ना ही असली बात है, कि जिसे आप सच मान बैठी थीं वो बस अपने आप को खास समझने की भूख थी। पर एक बात देखिएगा, राशिफल छोड़ना आसान है क्योंकि उसमें भूख को खिलाने का सीधा नुकसान भी दिख जाता है। असली परीक्षा वहाँ है जहाँ यही भूख किसी सम्मान भरे वाक्य, किसी तारीफ, किसी 'आप तो अलग हैं' वाली बात में छुपकर आती है, वहाँ पकड़ना उतना आसान नहीं रहता।


















