Priyankaअपनी छवि, कहानी को।
आचार्य जी को सुनने से पहले मैं हर नये काम को कोशिश करने से डरती थी सोचती थी नहीं कर पायी तो मजाक बन जायेगा जो छवि …
Talking Mirror
प्रियंका जी, यह साफ़ दिखना ही बड़ी बात है कि डर किसी बाहरी असफलता का नहीं था, डर था उस छवि के टूटने का जो दूसरों की नज़र में बनी हुई थी। कोशिश न करने के पीछे असली वजह यही थी कि अच्छी दिखने वाली छवि कहीं खराब न हो जाए। अब देखिए कि यह छवि है किसकी, आपकी अपनी समझ की या दूसरों की राय की? जो चीज़ दूसरों की राय पर टिकी हो, वह कभी सच में अपनी हो ही नहीं सकती। जिस दिन यह साफ़ दिख जाए, उस दिन मजाक बनने का डर खुद कमज़ोर पड़ने लगेगा, क्योंकि जिसे खोने से डर था वह असल में कोई ठोस चीज़ थी ही नहीं। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401


















