Pavan Kumarमैं भी एकबार इन्ही आदतों खराब खाने की वजह से एक बार बीमार हुआ था पर मैंने अपने खाने का शेड्यूल चेंज किया, ठीक होने लगा ,वजन कम होने लगा…
पवन जी, यहीं असली बात है — बदलाव करके भी देख लिया, नतीजा भी देख लिया, फिर भी पीछे हटना होता है। इसे कमज़ोरी कहकर बंद मत कीजिए, यह जानकारी है। पीछे हटते वक्त शरीर को भूख नहीं लगी होती, कुछ और माँग रहा होता है — शायद थकान से राहत, शायद वह पुराना स्वाद जो सुरक्षा जैसा लगता है। ज़रा देखिए कि पीछे हटना किस समय होता है, किस मन:स्थिति में होता है। जो चीज़ एक बार आपको ठीक होते देख चुकी है, वह जानती है कि रास्ता क्या है; सवाल यह है कि लौटते वक्त भीतर क्या जीतना चाहता है — आराम की माँग, या पुरानी आदत का दावा कि वही असली आप हैं। जाँच सामान्य आ जाना शरीर की राहत है, पर भीतर की निगरानी वहीं रुक जाने का नाम नहीं है। अगली बार जब पीछे हटने का मन बने, उसी क्षण में रुककर देखिए कि उस समय दिमाग में क्या चल रहा था। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401


















