
आचार्य जी को सुनने के बाद पता चला ऐसा कोई खोट नहीं है जो मुझ में ना हो,लेकिन फिर भी लोगों द्वारा दी गई छवि को बचाने के लिए अपने आप से ही झूठ बोलती हूँ......💯✍️
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आचार्य जी को सुनने के बाद पता चला ऐसा कोई खोट नहीं है जो मुझ में ना हो,लेकिन फिर भी लोगों द्वारा दी गई छवि को बचाने के लिए अपने आप से ही झूठ बोलती हूँ......💯✍️

गंगा जी, यहीं वह ममी पकड़ में आ रही है जिसकी बात पोस्ट में हो रही है। देखना मिल गया कि कोई खोट अनदेखा नहीं है, पर उसके ठीक बाद भी अपने आप से झूठ बोलना जारी रहता है, यही वह जगह है जहाँ असली काम होना बाकी है। जानना अलग बात है, और उस जानने को अपने ऊपर चलने देना अलग। जो छवि लोगों ने दी है उसे बचाने में आपको क्या मिल रहा है, वह सुरक्षा इतनी कीमती क्यों लगती है कि सच कहने से ज़्यादा भारी पड़ जाती है? इसी सवाल को पकड़े रहिए, देखना वहीं से शुरू होगा जहाँ बोलना बंद होता है। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401