
❓ अगर हम सच में दुनिया को उनकी आँखों से देखें, तो क्या हमारी अपनी जीवनशैली पर भी कोई सवाल उठेगा? ➡️हा , हमारी जीवनशैली पर सवाल उठेगा , सवाल ही नहीं कराह उठेगी। एक जीव के सबसे बड़ी पूंजी स्वतंत्रता होती है ,और वो कहां मिल पा रही है इस पृथ्वी के पशु पक्षियों को। उनकी आँखों से देखे तो हम उनको खाने को आ रहे है। उनमें ये डर लगा रहता है कि कब मौत आ जाए , हम मनुष्य उन्हें सुरक्षा व प्रेम के नाम पर बस मौत दे रहे है। उनको पृथ्वी पर बस मार काट दिखाई देगी ,उनको डर ,गुलामी , प्रदूषित वातावरण दिखाई देगा। हमारी जीवनशैली ने उनको भोग बना लिया है , हर दिन उनकी देह हमारा खाना बन गई है ,उनके प्राणों की कोई परवाह किए बिना बस खाए जा रहे है। माना वो हमसे लड़ नहीं सकते ,बोल नहीं सकते पर प्राण ,भाव ,जीव तो वो भी है। पीड़ा उनको भी होती है ,पर मनुष्य इतना ज्यादा क्रूर हो गया है वह जानवर को तो क्या अपनी प्रजाति को नहीं छोड़ता। उनकी निगाहों में पृथ्वी पर आग दिखाई देती है , जैसे सब जल रहा है।जब तक मनुष्य खुद को सही नियति से नहीं देखेगा तो वो अपने साथ भी ऐसे ही करेगा व पशुओं के साथ भी।



















