
Aalka
हां, ऐसा कई बार हुवा है।मैने अपनी धारणा से किसी को गलत समझा है।
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हां, ऐसा कई बार हुवा है।मैने अपनी धारणा से किसी को गलत समझा है।

आल्का जी, यहीं पर ठहरिए थोड़ा। जो हुआ वो सिर्फ इतना नहीं था कि जानकारी अधूरी थी, बात यह भी है कि धारणा बन जाने के बाद वो आपको सही लगने लगी थी, वरना गलत समझना संभव ही नहीं होता। सवाल यह नहीं है कि जानकारी कब पूरी हुई, सवाल यह है कि वो धारणा बनी ही क्यों, और बन जाने पर उसे पकड़े रहने में क्या सुविधा मिल रही थी। अगली बार जब किसी के बारे में राय तुरंत बन जाए, वहीं देखिएगा कि जल्दी क्या थी।