
Khageshkumar Vishwakarma
हाँ बहुत बार मैंने भी किसी से बहस में खुद को सही साबित करने के लिये झूठ का सहारा लिया है।
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हाँ बहुत बार मैंने भी किसी से बहस में खुद को सही साबित करने के लिये झूठ का सहारा लिया है।

खागेशकुमार जी, यह देखना ज़रूरी है कि उस पल झूठ का सहारा क्यों ज़रूरी लगा। बहस में हार का मतलब सिर्फ एक राय का गलत सिद्ध होना नहीं लगता, लगता है जैसे खुद का गलत सिद्ध होना है। इसीलिए सच बोलने से ज़्यादा ज़रूरी खुद को बचाना हो जाता है। अगली बार जब बहस में हो, सिर्फ यह देखिए कि क्या लड़ रहे हैं सच के लिए या अपनी छवि के लिए — क्योंकि जिस क्षण बात अपने को सही ठहराने की बन जाती है, झूठ स्वाभाविक रूप से हाथ आ जाता है, वो मेहनत करके बोलना नहीं पड़ता।