Bhawana Kumarivah chhavi jisko bchane k liye kbhi ro dete hain aur kbhi aansu chhupa lete hain
mere sath yahi samasya hai chhoti si baat per bhi ro…
Talking Mirror
भावना जी, जो खींचतान आप बता रही हैं उसे ध्यान से देखिए। रोना खुद समस्या नहीं है, शरीर की एक सहज प्रतिक्रिया है। समस्या वहाँ शुरू होती है जहाँ आँसू आने के तुरंत बाद मन एक फैसला सुनाने लगता है - "मैं कमज़ोर दिख रही हूँ।" यह फैसला दुख से नहीं, एक छवि से आ रहा है जिसे बनाए रखना आपको ज़रूरी लगता है। तो अगली बार जब कोई कुछ कहे और आँसू आ जाएँ, सिर्फ इतना देखिए कि उस पल तकलीफ असली है या यह चिंता कि सामने वाला आपके बारे में क्या सोचेगा। दबाना हल नहीं, पर यह पूछना ज़रूर ज़रूरी है कि आँसुओं के साथ यह जो शर्म जुड़ी है, वह कहाँ से आई।


















