
ये बात बिल्कुल ठीक कही गई है कि , अंधविश्वास सिर्फ भूत प्रेत या चुड़ैलों को मानना नहीं,बिना आंतरिक स्पष्टता के किसी बात को सत्य मन लेना भी उसी दिशा में ले जाता है। ये अधिकतर हम करते चले आ रहे है,किसी भी मान्यता को मानने से पहले हम विचार नहीं करते कि ये मान्यताएं आई कहा से ,और क्यों? अक्सर मैने एक चीज अपने ही घरों में देखा है कि लोग तुम्हारे मान्यताओं को गलत अंधविश्वास भी कह देंगे और भी अपनी मान्यताएं थोड़ी फेरबदल करके कहेंगे कि ये वाली ठीक है। मेरी मम्मी या दादी के साइड ऐसा ही होता है ।फिर यह ऐसा हो गया है कि लोग विरोध तो कर रहे है ,लेकिन दूसरों की धारणा को, अपने वाले को नहीं।



















