
Who am I? I am the role I choose to play ~Acharya ji क्यूट क्यूट ☺️☺️के टैग के नीचे दबकर कब मै खुदको इतनी नाजुक समझने लगे पता ही नहीं चला।😓पहले भी कई बार कुछ महीनों तक जिम स्टार्ट करने की कोशिश करी पर एक काम की तरह लगता था। ऐसा लगता था जैसे किसी और को, दुनिया के नजर में जो आइडल दिखना होता है उसके लिए क्यों ही जाना है उससे अच्छा नहीं जाती। बीच बीच में स्किप कर दिया करती थी। दूसरों के नजर में ये गीता प्रतिभागी के नाते एक कमजोरी भी है कि हम किसी को सही जीवन के बारे में बता रहे है और खुदके जीवन में दिख नहीं रहा। कुछ और ही दिख रहा है तो क्यों कोई मेरी बात सुने?? पर इस बार कुछ अलग हुआ इस बार मैने कुछ भी कहानी नहीं बनाई मन में बस बोला खुद से देखो बॉडी फैट सही नहीं हेल्थ के लिए फिर सॉल्यूशन क्या है..... जिम जाऊंगी और स्वस्थ रहूंगी बस।🙂 स्वस्थ क्यों रहना है ताकि घिस घिस कर ना जीना पड़े। ताकि जब अचानक से डिमांड आए शरीर की सही चीज के वक्त तो शरीर ही वहां रुकावट ना बने। फिर हसबैंड 🤝साथ देते हुए कहा चलो तो अब साथ जाते है और कभी किसी एक को आलस हो भी जाए तो अगला खींच के ले चलता है।😅😅 अब एक उत्साह रहता है। जैसे दिमाग की बत्ती जली हो।हमेशा खुदको वही वही देखते रहने से आजादी मिली। इससे ये नहीं होगा कि तुरंत बदलाव दिखे पर इससे एक बहुत बड़ा भ्रम टूटा कि कोई एक ऐसा भ्रम होता है जिसे तोड़ा ही नहीं जा सकता। ऐसी कोई भी मान्यता नहीं जिसे तोड़ा ना जा सके बस हमारा स्वार्थ न आड़े आए और खुद से प्रेम रहे🫰🏻 दर्द है पर ये दर्द दुख नहीं इसलिए शुभ है😎 आचार्य जी अब तैयारी है मैदान में सही ढंग से उतरने की 🙏🏻🙏🏻🙏🏻धन्यवाद!
























