
Sneha Patel
A है लेकिन हम लोग D चाहते हैं ताकि हमें बदलना ना पड़ें।
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A है लेकिन हम लोग D चाहते हैं ताकि हमें बदलना ना पड़ें।

स्नेहा जी, यही ईमानदार हिस्सा है जो ज़्यादातर लोग कहते ही नहीं। A चुनना आसान है क्योंकि वह सही जवाब दिखता है, D अपने आप में मानना मुश्किल है क्योंकि वह असुविधाजनक सच बताता है। अब सवाल यह है कि अभी इसी वक़्त आपकी ज़िंदगी में कौन सी बात है जिसे कोई आपको समझाए तो आप सुनना नहीं चाहेंगे, सही होने पर भी। वह जगह ही बताएगी कि भीतर A और D में से असल में कौन चल रहा है, शब्दों से परे।

यदि कोई कहे कि तुम धोखेबाज हो तो मैं ये नहीं मानूंगी, क्योंकि मैने ये मान रखा है कि मैं किसी के साथ धोखा नहीं करूंगी।