
हमारे भीतर ये चुनाव हमारी पुरानी धारणाएं करती हैं। जो लड़की को बोझ और लड़के को वंश बढ़ाने का जरिया समझता हैं। मेरे साथ शुरू से भेदभाव हुआ। मेरे मां बाप आज भी मुझ में और मेरे भाई में भेदभाव करते हैं। मुझे रोज किसी न किसी बात पर ताने सुनाए जाते है। और यह महसूस कराया जाता की में इस घर का हिस्सा नहीं हूँ। अगर मैं उस नर्क जैसे ससुराल और अपने पति के साथ रहने का फैसला आज ही के दु तो उन्हें बहुत खुशी होगी। पर मैं ऐसा कभी नहीं करूंगी। चाहे मुझे किराए का घर ही क्यों न ढूंढना पड़े। मैं बचपन से ही भेदभाव के खिलाफ अपने घर में लड़ाई करती थी। आज भी करती हूँ। पर लोग कल भी नहीं समझते थे और आज भी नहीं समझते। हमारे गांव में तो जब तक बेटा पैदा न हो तब तक बच्चे पैदा करते ही जाती हैं औरतें। ये कामना औरतों मे ज्यादा होती हैं।



















