
✍🏻 पोस्ट 5 | 2 सितंबर '26 💭 विषय — विश्व दर्शन ──────── 🐄 जुनैद और गाय: असली मालिक कौन था? एक बार सूफ़ी संत जुनैद अपने कुछ शिष्यों के साथ जा रहे थे। रास्ते में उन्होंने एक आदमी को देखा। वह एक गाय को रस्सी से बाँधकर अपने पीछे ले जा रहा था। 🗣️ जुनैद ने अपने शिष्यों से पूछा: “बताओ, इनमें से मालिक कौन है और गुलाम कौन?” शिष्यों ने कहा, “स्पष्ट है। आदमी गाय का मालिक है और गाय को अपने पीछे ले जा रहा है।” जुनैद ने कहा, “अगर बात इतनी ही स्पष्ट होती, तो मैं यह सवाल क्यों पूछता?” 🔪 उन्होंने किसी से चाकू या कैंची माँगी और गाय को बाँधने वाली रस्सी काट दी। गाय रस्सी से मुक्त होते ही भाग गई। और वह आदमी? वह उसके पीछे भागने लगा। जुनैद ने शिष्यों से पूछा: “अब बताओ, कौन किसके पीछे चल रहा है?” 🪢 गाय की रस्सी दिखाई दे रही थी, इसलिए उसकी गुलामी साफ़ थी। लेकिन आदमी की रस्सी कहाँ थी? उसकी रस्सी थी उसका “मेरा”। गाय वस्तु थी, लेकिन आदमी ने उस वस्तु पर अपना दावा बना लिया था। “यह मेरी गाय है” कहते-कहते वह अपनी ही पहचान उस गाय से जोड़ बैठा। यहीं बंधन और गहरा हो जाता है। 💭 सवाल यह नहीं कि मेरे पास घर है या पैसा है, सवाल यह है कि क्या मेरे होने का आधार ही इन चीज़ों पर टिका है? 🏠 घर की देखभाल करना बंधन नहीं है। 💰 पैसे का उपयोग करना बंधन नहीं है। 📱 तकनीक का इस्तेमाल करना बंधन नहीं है। बंधन तब है जब “मेरा” इतना मजबूत हो जाए कि वस्तु के बिना “मैं” अधूरा लगने लगे। सच्चा त्याग वस्तु का नहीं, उस “दावेदार” का है जो कहता है - “यह मेरा है, इसलिए मैं हूँ।” ❓तो अगली बार जब तुम कहो, “यह मेरा घर है।” “यह मेरा पैसा है।” “यह मेरा रिश्ता है।” “यह मेरी पहचान है।” एक पल रुककर पूछना: क्या मैं इन्हीं के सहारे अपने “मैं” को बचा रहा हूँ? ❓ इस कहानी का सबसे गहरा संदेश क्या है? A) 🐄 गाय को रस्सी से बाँधना ही असली गुलामी है। B) 🏠 वस्तुओं का होना ही मनुष्य को बंधन में डाल देता है। C) 🪢 किसी वस्तु पर “मेरा” का दावा करके उससे अपनी पहचान जोड़ लेना ही बंधन है। D) 💰 धन और संपत्ति का त्याग कर देना ही सच्चा त्याग है। स्रोत: https://acharyaprashant.org/en/articles/do-you-know-your-value-1_989b014












































