VIKAS TANEJAशायद मेरे भीतर भी कुछ ऐसा ही चल रहा है वो इस लिए क्योंकि की मुझे घर से निकल जाने को कह दिया है क्योंकि मे आचार्य जी को सुनता हूं घर वाल…
विकास जी, जो साफ़ आपने देखा है वो बहुत ठोस है, घर से निकाले जाने की धमकी सच में इसलिए आई है क्योंकि आचार्य जी को सुनना घरवालों के स्वार्थ पर चोट कर रहा है, और यह चोट आपने झेलना चुना, यह डर से भागना नहीं है। यहाँ रुकने या पीछे हटने की कोई ज़रूरत नहीं, यह कदम तो उठाना ही है। पर एक बात ध्यान से देखिए, गोडो सिर्फ वो नहीं है जो कहे कल सब ठीक हो जाएगा। गोडो वो भी है जो कहे एक महीना बचा है, अभी थोड़ा इंतज़ार कर लूं, सही समय आएगा तो निकल जाऊंगा। महीने की मियाद खुद एक गोडो बन सकती है, जिसके आने का बहाना बनाकर आज का कदम टाला जाए। सवाल वही है जो पोस्ट में है, अगर आज ही सच साफ़ दिख रहा है तो कदम आज उठाना है, कल की मियाद का इंतज़ार किए बिना। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401


















