
✍🏻 पोस्ट 19 | 20 अक्टूबर ’26 💭 विषय — इतिहास ───────────── 👉 माचिस बनाने वाली महिलाओं के जबड़े क्यों गलने लगे? लंदन की एक माचिस फ़ैक्टरी। काम करने वालों में बहुत-सी महिलाएँ और किशोर लड़कियाँ थीं। काम के घंटे लंबे थे, मजदूरी कम। देर से आने, बात करने और काम की मेज़ अस्त-व्यस्त होने पर जुर्माना कटता था। और इसी काम में उनके शरीर तक नष्ट हो रहे थे। 🏭 उन्नीसवीं सदी में माचिस बनाने के लिए सफेद फॉस्फोरस इस्तेमाल होता था। इसके लंबे संपर्क से कुछ कामगारों को “फॉसी जॉ” नाम की बीमारी हुई। दाँत गिरने लगते थे और जबड़े की हड्डी के ऊतक मरने लगते थे। दर्दनाक फोड़े पड़ते, चेहरा बिगड़ता और गंभीर मामलों में जबड़े का हिस्सा निकालना पड़ता था। कुछ पीड़ितों की मृत्यु भी हुई। मजदूरी उन्हें मिल रही थी। लेकिन उस मजदूरी के लिए कितनी कीमत चुकानी पड़ रही थी? 📜 जून 1888 में ऐनी बेसेंट ने लंदन की Bryant & May फ़ैक्टरी की परिस्थितियों पर लेख प्रकाशित किया। प्रबंधन ने कामगारों से लेख को गलत बताने वाले बयान पर हस्ताक्षर करने को कहा। उन्होंने इनकार किया। इसके बाद एक कामगार को निकाले जाने से विरोध भड़का। 5 जुलाई 1888 को लगभग 1,400 महिलाओं और लड़कियों ने काम छोड़ दिया। हड़ताल के बाद जुर्माने और कुछ कटौतियाँ हटाने तथा काम वाले कमरे से अलग भोजन की जगह देने जैसी माँगें स्वीकार हुईं। कामगारों का संगठन भी बना। सफेद फॉस्फोरस का इस्तेमाल तत्काल समाप्त नहीं हुआ। 🪞 यहाँ शोषण का अर्थ केवल कम मजदूरी नहीं है। दूसरे की मेहनत से लाभ लेना और उसके शरीर को हो रहे नुकसान को उत्पादन की कीमत मानकर चलना भी है। 🔎 अहंकार दूसरे को अपने उद्देश्य का साधन बना लेता है। उसकी मेहनत, समय और क्षमता चाहिए। उसकी तकलीफ़ मेरे हिसाब में कहाँ आती है? फिर अपने बचाव में कह देते हैं, “पैसे तो दे रहा हूँ।” पैसे दे देने से दूसरे के स्वास्थ्य और जीवन पर कितना अधिकार मिल गया? इतिहास के फ़ैक्टरी मालिकों का स्वार्थ दिखाई देता है। अब वहाँ देखें जहाँ ताक़त हमारे पास है, किसी से काम लेते समय, किसी की जरूरत या आर्थिक मजबूरी के सामने। क्या उसका नुकसान देखकर अपनी माँग बदलने की नीयत है, या उसके पास विकल्प न होने का फायदा उठा रहा हूँ? ❓ काम करने वाला दूसरा है, इसलिए उसकी तकलीफ़ मुझे अपने मुनाफ़े से छोटी क्यों लगती है? A. पैसे दे रहा हूँ, इसलिए अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेता हूँ। B. उसकी मजबूरी से अपना काम सस्ता होता है, इसलिए उसे जाँचना नहीं चाहता। C. नुकसान उसे हो रहा है; मुझे होता, तो मेरी कसौटी बदल जाती। D. शोषण गलत मानता हूँ, लेकिन उसे रोकने में अपना फायदा घटे, तो सफ़ाई देने लगता हूँ। स्रोत: The Matchgirls Memorial — The Story of the Strike https://www.matchgirls1888.org/the-story-of-the-strike UK Parliament — Commemoration of Matchgirls’ Strike https://hansard.parliament.uk/Commons/2025-07-16/debates/DD71CAD9-E90D-4DF2-9866-15FBA7C2A7A4/CommemorationofMatchgirls%E2%80%99Strike















































