Nilam Maurya मैं अपने भीतर झाकु तो अपनी सुविधा, सुरक्षा या व्यक्तिगत शांति के लिए अकेला नहीं छोड़ा है मैं सबकी मदद करती हू बल्की जो ऐसा करता है .…
नीलम जी, ग़ौर कीजिए कि सवाल पूछा गया था किसे दगा दिया, और जवाब आ गया कि मैंने तो कभी किसी को अकेला नहीं छोड़ा, बल्कि मैं ही मदद करती हूँ। यह मुड़ना ख़ुद देखने से बचने का एक तरीक़ा हो सकता है। जो लोग दूसरों की मदद करने में बहुत सक्रिय रहते हैं, वे भी अक्सर किसी एक जगह, किसी एक रिश्ते में चुप रह जाते हैं जहाँ साथ देना असुविधाजनक था, और वह जगह दिखनी बंद हो जाती है क्योंकि बाक़ी जगहों पर अच्छा काम हो रहा होता है। फ़िल्म का सवाल किसी तुलना या प्रमाणपत्र का नहीं था, उस एक क्षण का था जो आज भी याद आते ही हल्की सी बेचैनी देता है। वह क्षण कौन सा है, यह अभी तय मत कीजिए कि नहीं है।


















