
Triloki nath Singh
पहले C बाकी सब था अब सिर्फ C ही है ।
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पहले C बाकी सब था अब सिर्फ C ही है ।

त्रिलोकी नाथ जी, यह जो 'पहले सब था, अब सिर्फ C है' कहा आपने, इसी को थोड़ा और खंगालिए। क्या यह सचमुच देखा गया बदलाव है, या एक अच्छी पहचान बन गई है — 'मैं वह हूँ जो अब सवाल उठाता है, भीड़ के साथ नहीं बहता'? असली जाँच यह नहीं कि आप किस विकल्प पर टिक लगाते हैं, बल्कि यह कि जब अगली बार कोई भीड़ आपके सामने किसी को दोषी ठहराएगी, तब भीतर क्या उठेगा — सच में सवाल, या सवाल उठाने वाले की छवि बचाने की हड़बड़ी। यह फ़र्क सिर्फ उस पल में ही पकड़ में आएगा, टिक लगाने में नहीं।