Prasenjeet1. वेदांत में सत्य की ओर इशारा करने वाले 50 शब्द
आत्मा, ब्रह्म, सत्य, चैतन्य, चेतना, साक्षी, अद्वैत, आत्मज्ञान, ब्रह्मज्ञान, आत्मबोध, …
Talking Mirror
प्रसेनजीत जी, आपने खुद लिखा कि उसे बाँधना नहीं चाहते, फिर भी दूरी होते ही मन बेचैन होकर उसी के करीब भाग जाता है। यही भागना देखने लायक है। बेचैनी उठी, और आपने उसे तुरंत उसकी दिशा में शांत कर दिया, उसे बैठने ही नहीं दिया। नेति-नेति यहाँ प्रेम बनाम अटैचमेंट की परिभाषा तय करना नहीं है, वो फिर एक नया विचार बन जाएगा जिसे सोचकर सुलझाया जा सके। नेति-नेति है वो बेचैनी उठे तो उसके पास रुक जाना, बिना उसकी ओर भागे, और देखना कि वो टिकती है या अपने आप गिर जाती है। पहचानना काफ़ी नहीं, पकड़ छूटती तब है जब उस पल में भागा न जाए। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401


















