madhu sharmakisi serial ya movie m character ko rote dekh mujhe v rona ata h uske baad mai sochti q mai roi jbki mujhe ye pta ye sirf drama h
Talking Mirror
मधु जी, यही तो असली जगह है देखने की। आँसू आ गए, यह तो शरीर की सहज प्रतिक्रिया है, लेकिन असली सवाल वहाँ से शुरू होता है जहाँ आप पूछती हैं कि "मैं क्यों रोई।" वहीं रुक मत जाइए कि पता है ये ड्रामा है, इसलिए आगे बढ़ जाओ। बल्कि देखिए कि वह दृश्य आपके भीतर किस पुराने डर या इच्छा को छू गया। जिस किरदार को देखकर आँख भर आई, क्या वह किसी अस्वीकृति का डर था, किसी के खो जाने का डर था, या किसी को समझे जाने की चाहत थी? आँसू पात्र के लिए नहीं, उस जगह के लिए हैं जो भीतर पहले से मौजूद थी और कहानी ने बस उसे छेड़ दिया। यह पहचान लेना ही असली देखना है, सिर्फ रो लेना नहीं।


















